Diwaali

Diwali Poem by Hariwans Rai Bachchan (हरिवंशराय बच्चन)

8:48 AM
साथी, घर-घर आज दिवाली! फैल गयी दीपों की माला मंदिर-मंदिर में उजियाला, किंतु हमारे घर का, देखो, दर काला, दीवारें काली! साथी, घर-घ...

A Diwali Ghazal by Nazir Akbarabadi(नज़ीर अकबराबादी)

8:27 AM
दोस्तो! क्या क्या दिवाली में निशातो ऐश है। सब मुहैया हैं जो इस हंगाम के शायान हैं शै॥ इस तरह हैं कूच ओ बाज़ार पुर नक्शो निग़ार। हो ...

A Diwali Poem by Nazir Akbarabadi (नज़ीर अकबराबादी)

8:20 AM
हमें अदाएँ दिवाली की ज़ोर भाती हैं । कि लाखों झमकें हरएक घर में जगमगाती हैं ।। चिराग जलते हैं और लौएँ झिलमिलाती हैं । मकां-मकां में ब...